Class 10 भूगोल Chapter 4 कृषि Notes PDF in Hindi

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Class 10 भूगोल Chapter 4 कृषि Notes PDF in Hindi

Class 10 Social Science [ Geography ] Bhugol Chapter 4 Agriculture Notes In Hindi

10 Class भूगोल Chapter 4 कृषि Notes in hindi

10 Class Geography Chapter 4 Agriculture Notes

TextbookNCERT
ClassClass 10
Subjectभूगोल Geography
ChapterChapter 4
Chapter Nameकृषि Agriculture
CategoryClass 10 भूगोल Notes in Hindi
MediumHindi

अध्याय = 4
कृषि

Class 10 सामाजिक विज्ञान नोट्स
कृषि

कृषि के प्रकार

कृषि के प्रकार

प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि:-

 वह कृषि जिसमे केवल इतनी उपज हो कि परिवार का पेट किसी तरह से भर जाए, जीविका निर्वाह कृषि कहलाती है। इसे “कर्तन दहन खेती” भी कहते है। इसमें भूमि के किसी टुकड़े की वनस्पति को पहले काटा जाता है, फिर जला दिया जाता है।

बची हुई राख को मिट्टी में मिलाकर फसल उगाई जाती है। दो चार बार खेती करने के पश्चात उस भूमि को परती छोड़ दिया जाता है, फिर एक नई भूमि को खेती के लिए तैयार किया जाता है। इससे पहले वाली भूमि को इतना समय मिल जाता है कि प्राकृतिक तरीके से उसकी उर्वरता वापिस आ जाये। झूम, पामलू, दीपा, बेवर या दहिया, कुमारा, कुरुवा, मिलपा, मसोले इस खेती को और भी अन्य नामों से जाता है।

  • जमींन के छोटे से टुकड़े पर कृषि
  • आदिम उपकरण जैसे कुदाल, दाओ और खुदाई की छड़े
  • इस प्रकार की खेती मानसून और मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता पर निर्भर करती है।
  • कर्तन एवं दहन कृषि उदा. झूमिंग आदि।

गहन निर्वाह कृषि:- 

इस तरह की कृषि सघन आबादी वाले इलाकों में की जाती है। इस कृषि में जैव रसायनिक पदार्थों और सिचाई का अत्यधिक प्रयोग किया जाता है। इस तरह की कृषि पर जनसंख्या का भारी दबाव रहता है।

जनसंख्या के उच्च दबाव चाले क्षेत्रों में कृषि

  • श्रम प्रधान कृषि
  • उच्च उत्पादन के लिए जैव रासायनिक और सिंचाई की उच्च खुराक का उपयोग किया जाता है।
  • भूमि धारण का आकार अलाभकर है।

वाणिज्य कृषि:-

 जिसमें फसलों को केवल व्यावसायिक प्रयोग के लिए उगाया जाता है, व्यापारिक कृषि कहलाती है। यह कृषि करने का एक आधुनिक तरीका है। इस प्रकार की कृषि में बड़ी भूमि, श्रम, और मशीनों, का प्रयोग किया जाता है। कृषि के व्यावसायिकरण का स्तर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग है। जैसे- हरियाणा और पंजाब में चावल वाणिज्य की एक फसल है। लेकिन ओडिशा में यह आजीविका फसल है। रोपण कृषि भी एक प्रकार की वाणिज्यिक कृषि है।

  • HYV बीज, उर्वरक कीटनाशक अर र कीटनाशक जैसे आधुनिक इनपुट की उच्च खुराक का उपयोग।
  • रोपण एक प्रकार की व्यावसायिक खेती है।
  • चाय, कॉफी, गन्ना और केले का बागान व्यावसायिक खेती के उदाहरण हैं।

भारत में फसलों के मौसम को समझना

  1. रबी:- 
    रबी में फसलों की बुवाई के समय कम तापमान एवं गर्म जलवायु की जरूरत होती है। यह मानसून के अंत में लगाई जाई है।
    बुवाई- अक्टूबर से दिसम्बर
    कंटाई- अप्रैल से जून
    उदाहरण- गेहूँ, जी, मटर, सरसों
    प्रमुख उत्पादक- उ. प्र, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड
  2. खरीफ:- खरीफ अरबी भाषा का एक शब्द है। जिसका अर्थ है पतझड़ इसे मानसूनी फसल भी कहते है, क्योंकि यह मानसून के शुरुआत में लगाई जाती है। इन फसलों के लिए अधिक तापमान और शुष्क जलवायु की आवस्यकता होती है।
    बुवाई- मई से जुलाई
    कटाई- सितंबर से अक्टूबर तक।
    उदाहरण- धान, बाजरा, अरहर, मक्का गन्ना, कोदो, मूंगफली, सोयाबीन, तिल, उरद, मूँग
    प्रमुख उत्पादक- उ. प्र, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, केरल
  3. जायद:- रबी और खरीफ के मध्य में बोई जाने वाली फसलों को जायद फसल कहते है। यह सब्जियों की खेती का उपयुक्त समय है।
    बुवाई- अप्रैल से जून
    उदाहरण- तरबूज, खरबूजे, ककड़ी

प्रमुख फसलें

  1. खाद्य फसलें– गेहूँ चावल, मक्का, दलहन, तिलहन
  2. नकदी फसलें चाय, कॉफी, रबड़, जूट, कपास
  3. बागवानी फसलें– फल, फूल, सब्जियाँ

पाठ 4 – कृषि भूगोल के नोट्स| Class 10th

Class 10 सामाजिक विज्ञान नोट्स
कृषि

मुख्य फसलें

मिट्टी, जलवायु और कृषि पद्धति में अंतर के कारण देश के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की खाद्य और अखाद्य फसलें उगाई जाती हैं। भारत में उगाई जाने वाली मुख्य फसलें- चावल, गेहूँ, मोटे अनाज, दालें, चाय, कॉफी, गन्ना, तिलहन, कपास और जूट इत्यादि हैं।

  1. चावल: भारत में चावल की खेती बहुत बड़े भू-भाग पर की जाती है। यह भारत के दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में दैनिक भोजन का महत्वपूर्ण भाग है। त्योहारों और विशेष अवसरों पर इसे पकाया जाता है।
  2. चावल सबसे मुख्य घटक कार्बोहाइड्रेड के रूप में ऊर्जा प्रदान करता है। हमारा देश चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है। यह एक खरीफ की फसल है।
  3. जिसे उगाने के लिए उच्च तापमान (25o सेल्सियस से ऊपर) और अधिक आर्द्रता (100 सेमी. से अधिक वर्षा) की आवश्यकता होती है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसे सिंचाई करके उगाया जाता है। उत्पादक राज्य पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान हैं।
  4. गेहूँ:- गेहूँ भारत की दूसरी सबसे महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है। जो देश के उत्तर और उत्तर-पश्चिमी भागों में पैदा की जाती है। रबी की फसल को उगाने के लिए शीत ऋतु और पकने के समय खिली धूप की आवश्यकता होती है।
  5. इसे उगाने के लिए समान रूप से वितरित 50 से 75 सेमी. वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है। गेहूँ की बुवाई धान की फसल के बाद की जाती है। गेहूँ की बुवाई समय तथा पर्याप्त नमी होने पर करनी चाहिए। अन्यथा उपज में कमी आ जाती है।
  6. गेहूँ में प्रोटीन अधिक मात्रा में पाया जाता है। गेहूँ की खेती बलुई दोमट, भारी दोमट, मटियार, एवं कावर भूमि में की जाती है। साधनों की उपलब्धता होने पर हर प्रकार की भूमि पर गेहूँ की खेती की जाती है।
  7. देश में गेहूँ उगाने वाले दो मुख्य क्षेत्र हैं- उत्तर-पश्चिम में गंगा-सतलुज का मैदान और दक्कन का काली मिट्टी वाला प्रदेश। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, और राजस्थान के कुछ भाग गेहूँ पैदा करने वाले मुख्य राज्य हैं।
  8. मोटे अनाज (Millets): ज्वार, बाजरा और रागी भारत में उगाए जाने वाले मुख्य मोटे अनाज हैं। यद्यपि इन्हें मोटा अनाज कहा जाता है परंतु इनमें पोषक तत्त्वों की मात्रा अत्यधिक होती है।
  9. मोटे अनाज बढ़ती उम्र के बच्चों, शारीरिक मेहनत करने वाले कामगारों तथा बूढ़े लोगों के लिए बहुत आवश्यक है। उदाहरणतया, रागी में प्रचुर मात्रा में लोहा, कैल्शियम, सूक्ष्म पोषक और भूसी मिलती है।
  10. क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से ज्वार देश की तीसरी महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है। यह फसल वर्षा पर निर्भर होती है। अधिकतर आर्द्र क्षेत्रों में उगाए जाने के कारण इसके लिए सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है।
  11. सरकार ने 2018 को मोटे अनाज का वर्ष घोषित किया था। उत्पादक राज्य- महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश।
  12. बाजरा:- यह बलुआ और उथली काली मिट्टी पर उगाया जाता है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा इसके मुख्य उत्पादक राज्य हैं।
  13.  बाजरा शुष्क प्रदेशों की फसल है और यह लाल, काली, बलुआ, दोमट और उथली काली मिट्टी पर अच्छी तरह उगायी जाती है। बाजरे का प्रयोग उत्तर भारत में, ठंड में अक्सर प्रयोग किया जाता है।
  14. इसमें प्रोटीन, लौह तत्व, कैल्शियम, कार्बोहाइड्रेड, आदि पाए जाते है। बाजरा के प्रमुख उत्पादक राज्य कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, सिक्किम, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश हैं।
  15. मक्का:- यह एक नक़्क़ा प्रमुख खाद्य फसल है। यह मोटे अनाज की श्रेणी में आता है। मक्का कार्बोहाइड्रेड का अच्छा स्त्रोत है। जो खाद्यान्न व चारा दोनों रूप में प्रयोग होती है।
  16. यह एक खरीफ फसल है जो 21o सेल्सियस से 27o सेल्सियस तापमान में और पुरानी जलोढ़ मिट्टी पर अच्छी प्रकार से उगायी जाती है। बिहार जैसे कुछ राज्यों में मक्का रबी की ऋतु में भी उगाई जाती है।
  17. आधुनिक प्रौद्योगिक निवेशों जैसे उच्च पैदावार देने वाले बीजों, उर्वरकों और सिंचाई के उपयोग से मक्का का उत्पादन बढ़ा है। कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना मक्का के मुख्य उत्पादक राज्य हैं।
  18. दालें:- भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक तथा उपभोक्ता देश है। शाकाहारी खाने में दालें सबसे अधिक प्रोटीन दायक होती हैं। तुर (अरहर), उड़द, मूँग, मसूर, मटर और चना भारत की मुख्य दलहनी फसले हैं।
  19. दलहनी फसलों में अरहर का सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। अरहर की दाल में लगभग 20-21 % प्रोटीन पाया जाता है। दालों को कम नमी की आवश्यकता होती है और इन्हेंं शुष्क परिस्थितियों में भी उगाया जा सकता है।
  20. फलीदार फसलें होने के नाते अरहर को छोड़कर अन्य सभी दालें वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि की उर्वरता को बनाए रखती हैं। अतः इन फसलों को आमतौर पर अन्य फसलों के आवर्तन (rotating) में बोया जाता है। भारत में मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, और कर्नाटक दाल के मुख्य उत्पादक राज्य हैं।

Class 10 Geography Chapter 4 कृषि Notes in Hindi | कक्षा 10

Class 10 सामाजिक विज्ञान नोट्स
कृषि

खाद्यान्नों के अलावा अन्य खाद्य फसलें

  1. गन्ना:- गन्ना एक उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय फसल है। यह फसल 21° सेल्सियस से 27° सेल्सियस तापमान और 75 सेमी. से 100 सेमी. वार्षिक वर्षा वाली उष्ण और आर्द्र जलवायु में बोई जाती है।
  2. ब्राजील के बाद भारत गन्ने का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। गन्ने की खेती लोगों को रोजगार देती है। यह चीनी, गुड़, खांडसारी और शीरा बनाने के काम आता है।
  3. उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, बिहार, पंजाब और हरियाणा गन्ना के मुख्य उत्पादक राज्य हैं।
  4. भारत के गन्ना अनुसन्धान केंद्र
    • भारतीय गन्ना अनुसन्धान संस्थान, लखनऊ
    • वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट, पुणे
    • चीनी प्रोद्योगिकी मिशन, नई दिल्ली
    • गन्ना प्रजनन संस्थान, कोयम्बतूर तमिलनाडु
  5. तिलहन: तिलहन की खेती के लिए जुलाई महीना सबसे अच्छा माना जाता है। तिलहन की खेती में पानी की कम आवश्यकता होती है। साथ ही यह पशुओं के चारे के लिए भी उपलब्ध है।
  6. 2017 में भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा बड़ा तिलहन उत्पादक देश था। सन् 2017 में तोरिया के उत्पादन में भारत का विश्व में कनाडा और चीन के बाद तीसरा स्थान था।
  7. देश में कुल बोए गए क्षेत्र के 12 प्रतिशत भाग पर कई तिलहन की फसलें उगाई जाती हैं। मूँगफली, सरसों, नारियल, तिल, सोयाबीन, अरंडी, बिनौला, अलसी और सूरजमुखी भारत में उगाई जाने वाली मुख्य तिलहन फसलें हैं।
  8. इनमें से अधिकतर खाद्य हैं और खाना बनाने में प्रयोग किए जाते हैं, परंतु इनमें से कुछ तेल के बीजों को साबुन, प्रसाधन (शृंगार का सामान) और उबटन उद्योग में कच्चे माल के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।

  9. गुजरात मूँगफली का प्रमुख उत्पादक राज्य है। इसके अतिरिक्त राजस्थान और आंध्र प्रदेश मूँगफली के अन्य मुख्य उत्पादक राज्य हैं (2016-17)।
  10. मूंगफली की खेती के लिए अच्छे जल निकास भुरभुरी दोमट व् बलुई दोमट भूमि की आवश्यकता होती है। मूंगफली की फलियों का विकास भूमि के अंदर होता है।
  11. चाय:- चाय की खेती रोपण कृषि का एक उदाहरण है। यह एक महत्त्वपूर्ण पेय पदार्थ की फसल है। यह चाय के पौधों की पत्तियों से बनता है। जिसे शुरुआत में अंग्रेज़ भारत में लाए थे।
  12. आज अधिकतर चाय बागानों के मालिक भारतीय हैं। चाय का पौधा उष्ण और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु, ह्यूमस और जीवांश युक्त गहरी मिट्टी तथा सुगम जल निकास वाले ढलवाँ क्षेत्रों में भली भाँति उगाया जाता है।
  13. चाय के मुख्य उत्पादक क्षेत्रों में असम, पश्चिमी बंगाल में दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी जिलों की पहाड़ियाँ, तमिलनाडु और केरल हैं। इनके अलावा हिमाचल प्रदेश, उत्तराखण्ड, मेघालय, आंध्र प्रदेश और त्रिपुरा आदि राज्यों में भी चाय उगाई जाती है।
  14. सन् 2017 में भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा बड़ा चाय उत्पादक देश था। जैविक खेती के कारण जैविक चाय का भी उत्पादन बढ़ा है। इसकी खेती मुख्यतः फ्रांस, जर्मनी, जापान, अमेरिका, एवं ब्रिटेन में की जाती है।
  15. कॉफी:- कॉफी को कहवा भी कहते है। कॉफी की खेती छायादार स्थानों पर की जाती है। कॉफी की खेती करने के लिए समशीतोष्ण जलवायु एवं कार्बनिक पदार्थ युक्त दोमट मिट्टी की आवश्यकता होती है।
  16. भारतीय कॉफ़ी अपनी गुणवत्ता के लिए विश्वविख्यात है। हमारे देश में अरेबिका किस्म की कॉफ़ी पैदा की जाती है। जो आरम्भ में यमन से लाई गई थी। इस किस्म की कॉफ़ी की विश्व भर में अधिक माँग है।
  17. इसकी कृषि की शुरुआत बाबा बूदन पहाड़ियों से हुई और आज भी इसकी खेती नीलगिरि की पहाड़ियों के आस-पास कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में की जाती है।

  18. बागवानी फसलें: बागवानी एक व्यापक क्षेत्र होने के साथ-साथ कला और विज्ञान है। जिसमे फलों और सब्जियों के आलावा विभिन्न प्रकार के फूलो, जड़ी-बूटियों,एवं सजावटी पौधों का वैज्ञानिक उत्पादन प्रयोग तथा व्यवसायीकरण किया जाता है।
  19. सन् 2017 में भारत का विश्व में फलों और सब्जियों के उत्पादन में चीन के बाद दूसरों स्थान था। भारत उष्ण और शीतोष्ण कटिबंधीय दोनों ही प्रकार के फलों का उत्पादक है।
  20. भारतीय फलों जिनमे महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बंगाल के आम, नागपुर और चेरापूँजी (मेघालय) के संतरे, केरल, मिजोरम, महाराष्ट्र, और तमिलनाडु के केले, उत्तर प्रदेश और बिहार की लीची, मेघालय के अनानास, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के अंगूर तथा हिमाचल प्रदेश और जम्मू व कश्मीर के सेब, नाशपाती खूबानी और अखरोट की विश्वभर में बहुत माँग है।
  21. केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान की स्थापना 4 सितम्बर 1972 को भारतीय बागवानी संस्थान बंगलौर में केंद्रीय आम अनुसन्धान केंद्र के नाम से की गयी थी।

  22. जूट:- जूट को सुनहरा रेशा कहा जाता है। जूट की फसल बाढ़ के मैदानों में जलनिकास वाली उर्वरक मिट्टी में उगाई जाती है जहाँ हर वर्ष बाढ़ से आई नई मिट्टी जमा होती रहती है।
    इसके बढ़ने के समय उच्च तापमान की आवश्यकता होती है। इसका प्रयोग बोरे, तिरपाल, रस्सियाँ, दरी, तम्बू, कपड़ें तथा कागज बनाने में किया जाता है। पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और ओडिशा तथा मेघालय जूट के मुख्य उत्पादक राज्य हैं।
  23. कपास:- भारत को कपास के पौधे का मूल स्थान माना जाता है। सूती कपड़ा उद्योग में कपास एक मुख्य कच्चा माल है। कपास उत्पादन में भारत का विश्व में चीन के बाद दूसरा स्थान है (2017)।
    दक्कन पठार के शुष्कतर भागों में काली मिट्री कपास उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इस फसल को उगाने के लिए उच्च तापमान, हल्की वर्षा या सिंचाई, 210 पाला रहित दिन और खिली धूप की आवश्यकता होती है।

    यह खरीफ की फसल है और इसे पककर तैयार होने में 6 से 8 महीने लगते हैं। यह एक लम्बी अवधि की फसल है। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश कपास के मुख्य उत्पादक राज्य हैं।

class 10th Sst कृषि chapter notes ||class 10th krishi chapter 4

Class 10 सामाजिक विज्ञान नोट्स
कृषि

कृषि प्रक्रिया

  • जुताई ⟶ बुआई ⟶ सिंचाई ⟶ निराई ⟶ खाद ⟶ डालना ⟶ कीटनाशकों का छिड़काव ⟶ कटाई ⟶ थ्रेशिंग ⟶ अनाज

प्रमुख बिन्दु:-

  1. भारत में चावल ऊँचाई और जलवायु की बदलती स्थितियों में बोया जाता है। चावल की फसल को गर्म और नम जलवायु की आवश्यकता है। चावल की फसल के लिए तापमान 50 से 52 सेल्सियस के बीच होना चाहिए।
    चावल की खेती मुख्य रूप से दो प्रकार की मिट्टी में की जाती है। ऊपरी भूमि, निचली भूमि चावल हरियाणा और पंजाब में एक वाणिज्यिक फसल है, लेकिन ओडिशा में, यह एक जीविका फसल है। मेहर, सरिफुल, आदि चावल की किस्में भारत में पायी जाती है।
  2. कृषि की वह विधि जो एक बड़े भाग में उन्नत किस्म के बीजों, कीटनाशकों एवं आधुनिक कृषि यंत्रों के साथ एक निश्चित फसल का उत्पादन व्यापार व निर्यात के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाता है, रोपण कृषि कहते है।
    विशेषताएँ- कृषि के एक बड़े भाग की प्रधानता, आधुनिक कृषि पद्धति का प्रयोग, कृषि रसायनों एवं उर्वरकों का अधिक मात्रा में प्रयोग, कच्चे माल का उत्पादन, आदि।
  3. भारत में महत्वपूर्ण रोपण फसलें- चाय, कॉफी, रबर, गन्ना, केला आदि।
  4. चावल भारत के अधिकांश लोगों की मुख्य फसल है। हमारा देश दुनिया में चीन के बाद चावल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। चावल को त्योहारों और विशेष अवसरों पर पकाया जाता है।
  5. असम, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में एक साल में धान की तीन फसलें उगाई जाती हैं। ये हैं – आस, अमन और बोरो।
  6. गेहूँ भारत की एक मुख्य फसल है, गेहूँ की खेती के लिए तापमान 20-25 डिग्री सेंटीग्रेट उपयुक्त माना जाता है। गेहूँ की खेती सिचाई पर निर्भर है। भारत में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश मुख्यतः फसल उत्पादक राज्य है।
  7. भारत में गेहूँ के बाद उगाई जाने वाली दूसरी मुख्य फसल मक्का है। मक्का की खेती मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ी इलाकों तक की जाती है। मक्का मनुष्यों और पशुओं के आहार के साथ औधोगिक नजरिये से भी खास है।
    इसमें कार्बोहाइड्रेड, विटामिन, एवं प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। मक्का की फसल के लिए 400-600 मी.ली. पानी की आवश्यकता होती है।
  8. ज्वार, बाजरा और रागी भारत में उगाए जाने वाले महत्वपूर्ण मोटे अनाज हैं। हालांकि, इनको अनाज के रूप में जाना जाता हैं। किन्तु इनमें पोषक तत्वों की मात्रा बहुत अधिक हैं। ज्वार, क्षेत्र और उत्पादन के संबंध में तीसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसल है।
  9. भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है।
  10. गन्ना भारत की महत्वपूर्ण वाणिज्यिक फसल है। ब्राजील के बाद भारत गन्ने का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। गन्ने की खेती के लिए काली मिट्टी, पीली मिट्टी, तथा रेतीली मिट्टी, उत्तम मानी जाती है।
  11. मूँगफली भारत की मुख्य तिलहनी फसल है। मूँगफली की खेती के लिए अच्छे जल निकास भुरभुरी दोमट व बलुई दोमट की आवश्यकता होती है। यह मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान, पंजाब, आँध्रप्रदेश, तमिलनाडु में उगाई जाने वाली महत्वपूर्ण फसल है।
  12. दुनिया में चाय उत्पादन में 2020 में चीन-प्रथम और भारत – दूसरा।
  13. 2013 में, भारत दुनिया में फलों और सब्जियों का चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश था।
  14. फसल चक्र:- फसल की उत्पादकता और भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए भूमि के एक टुकड़े पर विभिन्न फसलों को उगाना फसल चक्र कहलाता है।
  15. कर्तन दहन प्रणाली/स्थानांतरित कृषि:- स्थानांतरित कृषि वह कृषि होती है। जिसमे भूमि का टुकड़ा कुछ समय के लिए फसल बोने के लिए तैयार किया जाता है और उपजाऊपन कम होने के बाद भूमि के दूसरे टुकड़े को चुन लिया जाता है। यह सबसे पुरानी कृषि पद्धति है और हज़ारों वर्षों से चली आ रही है। स्थानांतरित कृषि के कारण मृदा अपरदन होता है।
  16. श्वेत क्रांति:- दूध उत्पादन में वृद्धि के लिए पशुओं की नस्लों में सुधार लाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग। इसे ऑपरेशन फ्लड भी कहा जाता हैं।
  17. हरित क्रांति:- उत्पादन बढ़ाने, विशेष रूप से गेहूँ का उत्पादन बढ़ाने के लिए HYV बीजों के उपयोग, आधुनिक प्रौद्योगिकी, उर्वरक तथा कीटनाशकों का प्रयोग।
  18. जूट की खेती गरम और नम जलवायु में होती है। जूट रेशेदार पौधा है। इसका प्रयोग बोरी, दरी, तिरपाल, टाट, रस्सियाँ आदि बनाने में किया जाता है। भारत में यह खेती बंगाल, बिहार, उड़ीसा, असम में की जाती है। जूट को गोल्डन फाइबर के रूप में जाना जाता है।

Class 10th Geography Chapter – 4 || कृषि (Agriculture) Notes in hindi

 विश्व में कौन सा देश तिलहन उत्पादन में अग्रणी है?

उत्तर- भारत

रेशम उत्पादन के लिए रेशम के कीड़ो को पालना क्या कहलाता है?

उत्तर-  सेरी कल्चर

कौन-सा देश विश्व में फल एवं सब्जियों का सबसे बड़ा उत्पादक है?

उत्तर-  भारत

भारत की चार रबी तथा चार खरीफ फसलों के नाम लिखी।

उत्तर- रबी – गेहूँ, चना, जौ, मटर, सरसों आदि
खरीफू – चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर, मुंग आदि।

रोपण कृषि की दो विशेषताएँ लिखी।

उत्तर- 
रोपण कृषि व्यापक क्षेत्र में की जाती है।
अधिक पूंजी और श्रम की आवश्यकता।

दलहन तथा तिलहन फसलों के चार उदाहरण लिखी।

उत्तर- दलहन – अरहर, मूंग, उड़द, मटर, चना, मसूर आदि।
तिलहन – मूँगफली, सरसों, अलसी, तिल, सोयाबीन आदि।

रेशम उत्पादन के लिए रेशम के कीड़ों को पालना कृषि का कौन सा प्रकार है ?

उत्तर- सेरीकल्वर

कर्तन दहन कृषि या स्थानांतरीय कृषि विभिन्न देशों में किन-किन नामों से जाना जाता है ?

उत्तर- मैक्सिको तथा मध्य अमेरिका – मिलपा
वेनेजुएला – कोनुको
ब्राजील – रोका
इंडोनेशिया – लदाग
वियतनाम – रे
मध्य अफ्रिका – मसोले

जीविका निर्वाह कृषि की दो विशेषताएँ ।

उत्तर-
भूमि के छोटे टुकड़ों पर परंपरागत रूप से कृषि करना।
प्राय: मानसून, मृदा की प्राकृतिक उर्वरता तथा फसल उगाने की पर्यावरणीय परिस्थितियों की उपयुक्तता पर निर्भर।

 गहन कृषि के दो गुण ।

उत्तर-
अधिक उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों तथा सिंचाई का प्रयोग।
भूखंडो का आकार छोटा होने पर कई-कई फसलें उगाना।

‘ऑपरेशन फ्लड’ किससे संबंधित है ?

उत्तर- दुग्ध उत्पादन में वृद्धि के लिए

आर्गेनिक कृषि (जैविक कृषि) क्या है ?

उत्तर-  प्राकृतिक तरीकों से कृषि, उर्वरकों, कीटनाशकों का प्रयोग न करके कृषि करना कार्बनिक कृषि/आर्गेनिक कृषि या जैविक कृषि कहते है।

“सुनहरा रेशा’ किस फसल को कहा जाता है ?

उत्तर- जूट या पटसन

10th CLASS Geography Notes in Hindi अध्याय 4 : कृषि

NCERT Class 6 to 12 Notes in Hindi

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